अंकित हत्याकांड: माँ बाप की इंसानियत को सलाम, मुसलमानों को लेकर दिया यह बयान…

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ग़लत ग़लत होता है लेकिन ग़लत पर आपा खो कर और ग़लत कर जाना कभी सही नहीं हो सकता है। इसे अंकित के माँ बाप ने हमें बख़ूबी समझाया है।अंकित को मुसलमान ने नहीं मारा है बल्कि उस विचारधारा ने मारा है जिसे हमारा समाज सहमति के नज़र से नहीं देखता है। अंकित की जगह अगर रिज़वान भी होता तो उसे मार दिया जाता या वो लड़की हिंदू होती तो भी अंकित को मार दिया जाता।भारत में ऑनर किलिंग का ये पहला मौक़ा नहीं है, इससे पहले भी हज़ारों ऐसे मौक़ों पर इंसानियत की जान जाती रही है लेकिन सोशल मीडिया पर ये मुद्दा ऑनर किलिंग का नहीं है बल्कि एक तरफ़ मुस्लिम लड़की की ईज़्ज़त बचाने के लिए हिन्दू लड़के के क़त्ल का है तो दूसरी तरफ़ हिन्दू लड़के को मुसलमान लड़की से प्यार करने पर क़त्ल कर देने का है।

एक बात समझियेगा…
बजरंग दल से जुड़ा था जौहर।
बजरंग दल से जुड़ा था जौहर!
बजरंग दल से जुड़ा था जौहर?
इन सब में क्या फर्क है? बताइये,
आप यही कहेंगे ना, एक तरफ बताया जा रहा है, दूसरी तरफ पूछा जा रहा है या शक किया जा रहा है। फिर ‘आज तक’ वाली फ़ोटो जिसमे फ्रंट पर अंकित का फोटो है जिसके नीचे लिखा हुआ है, बजरंग दल से जुड़ा था अंकित”?” कैसे प्रमाणित करता है कि अंकित भी बजरंग दल के उसी मुहिम का हिस्सा था जिसकी पेपर कटिंग कल से फेसबुक पर तैर रही है?मुझे अब एक बात समझ नहीं आ रही है, हम हत्या को हत्या की तरह क्यों नहीं देख सकते हैं, हत्यारे का मज़हब ढूंढना हमेशा हमारे लिए इतना ज़रूरी क्यों हो जाता है?

अंकित की माँ अपनी चुनरी से अंकित के गले से रिसते खून को बंद करने की कोशिश कर रही थी, बार बार लोगों से मदद की मिन्नतें कर रही थी, किसी मे मदद नहीं की, कौन लोग थें वो जो देख कर अनदेखा कर गयें? अंकित मर गया और हम सोशल मीडिया वालों ने इंसानियत को सिरे से खारिज़ करते हुए इस क़त्ल को हिन्दू मुसलमान के रंग में डुबो दिया।अंकित के पापा अपने हाथों से अपने जवान बेटे की चिता में आग दे कर घर आते हैं, और अपने बेटे की अस्थि संभाल कर कहते हैं इस क़त्ल को मज़हबी रंग मत दीजिये, हमें किसी मज़हब से बैर नहीं है ये सिर्फ़ दो परिवारों के आपस का मामला है। हमें इंसाफ चाहिये, कातिलों को सज़ा मिलनी चाहिए।

और हम फेसबुकिये हैं कि अंकित का संघ से कनेक्शन ढूंढ रहे हैं। कनेक्शन के नाम पर क्या मिला हमें? बस आज तक कि वो वाली फोटो और बजरंग दल का वो बयान जिसे फेसबुक पर लगा कर अंकित को गुनाहगार बनाया जा रहा है। मुझे तो बिना ढूंढे अंकित की टोपी पहने अपने मुसलमान दोस्तों के साथ जश्न मनाती फोटो दिखी, मज़ार पर दुआ मांगती फोटो नज़र आई।सच में! बीमार हो चुके हैं हम सभी, सड़ चुके हैं, इतना मुश्किल क्यों होता है सभी घटनाओं को एक नज़र से देखना? एक घटना में आरोपी सीधे क़ातिल हो जाता हैतो दूसरी घटना में आलोचना तो होती है साथ मे “लेकिन” लगा होता है।सच कहूँ तो, आज अंकित के परिवार वालों की मानसिकता के आगे हमारी मानसिकता काफी बौनी नज़र आ रही है।।
Joher Siddiqui की फेसबुक पोस्ट से

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